Mission 2019 - Aakhir Rashtraniti Pe Rajniti Havi Kyun?
हर आम भारतीय की तरह मेरी निगाह भी हमेशा बनी रहती है की आखिर आगे हमारे देश की राजनीती में क्या होने वाला है। २०१४ के परिणामो की बात करें तो माननिये प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्वा में भारतीय जनता पार्टी ने अपने सहयोगी दलों जैसे की शिवसेना, अकालीदल , तेलगु देशम पार्टी आदि के साथ मिल के पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।
अब हर कोई यही सोचता है की आखिर २०१९ का क्या? खैर विपक्ष तो मान के बैठा है की राजग १ की तरह ही राजग २ दुबारा सरकार नहीं बना पायेगी। हलाकि उनकी इस सोच के पीछे बहुत से स्वाभाविक कारन भी हैं जैसे की GST, नोटेबंदी या और भी कई ऐसे ही महत्वपूर्ण परन्तु कड़वे कदम।
जब राजग २ आयी तो उस समय हमारे ब्यूरोक्रेसी को काम न करने या आराम से करने की आदत थी और जाहिर सी बात है विपक्षी राजनेताओ को तो जैसे काम करना ही नहीं होता था परन्तु मोदी जी ने इन सब को बदल के रख दिया। यह बात बहुतों को पसंद नहीं आयी की आखरी हमारी सालों की कार्य सस्कृति को कोई इंसान इतनी जल्दी कैसे बदल सकता है और पुरे सिस्टम को कैसे बदलने की सोच सकता है और यही से शुरुवात हुई एक षड्यंत्र की। षड्यंत्र की आखरी मोदीजी को प्रधानमंत्री के पद पर कैसे न बैठने दिया जाये फिर चाहे भारतीय जनता पार्टी की सरकार में ही दूसरा कोई ही प्रधानमंत्री क्यों न बन जाये पर मोदीजी नहीं।
फिर मोदीजी के विजय रथ को रोकने के मकसद से पहले तो कभी बीफ तो कभी अवार्ड वापसी। इससे भी मन नहीं भरा तो दलितों पे अत्याचार का प्रचार प्रसार किया गया और यह सभी मुद्दे तभी उठे जब किसी न किसी राज्य में चुनाव होने होते थे परन्तु फिर भी एक एक कर १९ राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती गयी। जब विपक्ष को यह एहसास हो गया की अब धर्म की राजनीती या जात पात के नाम पे आरक्षण माँगा चुनाव में अप्रसांगिक हो चूका है और वैसे ही सभी विपक्षी चेहरे अप्रासंगिक हो चुके हैं तो गुजरात चुनाव में एक नया चाल चला गया की नए नए लड़को को युथ के नाम पे खड़ा करो और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने को बोलो। टेक्निक वही जात पात की पर नए तरीके से मने की चेहरे नए होने चाहिए।
अब बारी थी किसी विभीषण की जिससे की भरपूर माहौल बनाया जा सके की मोदीजी लोगो को अपने साथ लेके नहीं चल सकते तो विपक्ष को साथ मिला पहले से बागी बने बैठे यशवंत सिन्हा, शत्रुघन सिन्हा, प्रवीण तोगड़िया, शिवसेना, मनसे आदि के रूप में जो की पहले पीछे से हमले करते थे अब से सामने से करेंगे और पूरी कोशिश करेंगे की भले राजग की सरकार द्वारा किये गए अच्छे काम जैसे की जन धन योजना, उजाला योजना, उज्वला योजना, मुद्रा योजना आदि की सरकार फिर से बन जाये पर पूर्ण बहुमत की मोदीजी के नेतृत्वा की सरकार न बने क्योकि पूर्ण बहुमत न आने की सूरत में सहयोगी दल मिलने मुश्किल होंगे क्योंकि सबको मालूम है मोदीजी की सरकार में गठबंठन को इज्जत तो मिलती है पर मनमानी करने को नहीं मिलती। और इन सब में बिच बिच में तड़का लगाने को कन्हैया, आम आदमी पार्टी आदि तो बैठे ही हुए हैं। हालाँकि मेरा मानना है की गठबंधन को मजबूती देना चाहिए न की मजबूरी बनना चाहिए और राष्ट्रहित में उठाये गए कदमो का समर्थन करते हुए उसका सकरात्मक पचार प्रसार करना चाहिए।
इन्ही सभी बातों की देन है की रामजन्म भूमि केस जिसकी की सुनवाई फ़रवरी महीने से रोजाना होनी है तो विपक्ष माननिये मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ ही महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने पे भी विचार करने लगे।
खैर देखने की बात होगी की भारतीय राजनीती क्या करवट लेती है लेकिन भारतीय जनता पार्टी को विभीषणों से बचने की सख्त जरुरत है और जो गलतियों को समय से गुजरात में नहीं संभाला जा सके वैसे चीजें दुबारा न हो यह ध्यान देने की है।
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